Tuesday, August 12, 2008

हवा में तैरती मौत


समृद्धि भटनागर



विमान-यात्रा भी अब जोखिमपूर्ण होती जा रही है। पिछले दिनों इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई हवाई घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हवाई यात्रा सुरक्षित है?


इस भागती दौड़ती जिंदगी में, अपने कीमती समय को बचाने के लिए विमान से यात्रा करना आम होता जा रहा है। परंतु सवाल उठता है कि जिसे आप सुविधा का माध्यम मानते हैं उसमें आप कितने सुरक्षित हैं? बात जुलाई के अंतिम सप्ताह की है। जेट एयरवे”ा का एक विमान, जिसमें केंद्रीय मंत्री शरद पवार भी यात्रा कर रहे थे, अपनी उड़ान भरने के बाद 5000 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचते ही वापस दिल्ली हवाई अड्डे पर लौटा दिया गया। क्यों? इसलिए कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अचानक पाया गया कि विमान का पिछला दरवाजा ठीक से बंद नहीं था। यानी, एक बड़ा हादसा होने से बचा लिया गया। हाल ही में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई एक और हवाई घटना दिल्ली से माॅरीशस जाने वाली फ्रलाईट एमके 745 में हुई जब विमान उड़ने के लिए रनवे पर चल रहा था और अचानक सामने एक चिड़िया आई जिसके कारण पायलट ने ब्रेक लगा दिया। ब्रेक लगाने पर विमान के पिछले हिस्से में नीचे की तरपफ धुआं निकलने लगा और आग लग गई। विमान में सवार यात्रियों को तत्काल नीचे उतार लिया गया। विमान में 241 यात्री सवार थे और उनके लिए यह मंजर एक ऐसा कड़वा सच था जिसे अपनी पूरी जिंदगी में शायद ही भुला पाएं। सवार यात्रियों को मोटेल में ठहराया गया और अगले ही दिन एक स्पशेल फ्रलाइट से भेजा गया। पर तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों को एक बार पिफर परेशानी का सामना करना पड़ा। 241 यात्रियों में से काफी यात्राी ऐसे थे जो अपने हनीमून, बिजनेस वगैरह के सिलसिले में जा रहे थे। एक ऐसी गर्भवती महिला यात्राी भी थी जो अकेली सफर कर रही थी और उन्हें इस पूरे हादसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वह इस हादसे के दौरान अपने बच्चे के लिए भगवान से सलामती की दुआ मांगती रही। उनका कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें यह दिन देखना पड़ेगा। सवाल फिर से यात्रियों की सुरक्षा को और सरकार की लापरवाही को लेकर खड़ा होता है कि जब ऐसे मामले आम हैं तो कोई एहतियात क्यों नहीं बरती जा रही है? कहीं पक्षी के टकराने के कारण तो कहीं तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों की जान जोखिम में ही रहती है। डायरेक्टरेट जनरल आॅपफ सिविल ऐविएशन ;डीजीसीएद्ध ने भी अपनी जांच में सापफ कहा है कि यह एक बड़ा हादसा है और ऐसे हादसों से बचने के लिए एहतियात बरतनी चाहिए। जहां डीजीसीए एहतियात बरतने के लिए विचार कर रही है, वहीं दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड सारे आरोपों को गलत बताते हुए कहती है कि ऐसे हादसों को टालने के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड प्रोसीजर अपनाए गए हैं। अगर ऐसी एहतियात बरती जा रही है तो फिर बार-बार ऐसे हादसे सामने क्यों आते हैं? डाॅ. एके मल्होत्रा, वाइल्ड लाइपफ एक्सपर्ट ने समस्या की जड़ से अवगत कराते हुए बताया कि एयरपोर्ट के पास एक मुख्य बाजार है जहां मीट की दुकानें हैं जो जानवरों का मांस वगैरह पीछे फेंकती है। अपने खाने और रहने की खोज के कारण चिड़ियों का वहां जमावड़ा रहता है और इसी कारण ऐसे हादसे अपना आकार लेते हैं। अगर सरकार इस कूड़े-कचरे को वहां से नहीं हटाएगी तब तक सरकार चाहे जितनी भी एहतियात बरत ले, इसका समाधान नहीं हो सकेगा और ऐसे कई मामलों के सामने आने के आसार बरकरार रहेंगे। लेकिन ऐसे बयानों के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि हर कोई अपनी गलती और राय एक-दूसरे पर थोपने पर आमादा है, जबकि जरूरत समस्या के समाधान की है। यात्राी जो अपनी सुविधा के लिए पैसे खर्च करने के बावजूद निश्चिंत होकर यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, सवाल इनकी सुरक्षा का खड़ा होता है। इस हादसे के बाद सिपर्फ माॅरीशस की फ्रलाईट में सवार यात्राी ही नहीं, बल्कि आम जनता भी हवाई यात्रा में अपने आपको महफूज नहीं समझ पा रही है। देखने वाली बात यह है कि सरकार किस तरीके से यात्रियों को विश्वास दिलाएगी कि अब वे लोग विमान यात्रा में पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

1 comment:

sushant jha said...

अच्छा है हिन्दी में लिखा करो